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Monday, 27 May 2019

राज जितने भी दफ़न थे...

आज उनसे गुफ्तगू में बात बिसरी बोल दी।
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।।

हम जो तब उनसे मिले थे
आधी में दीपक जले थे
बात ही कुछ यूं हुई थी
जो जुबा ने बोल दी

राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।

शाम थी बेबाक अपनी
और सब माधोहोश थी
थी सुबह खुशबू का झोंका
जो सहद सी घोलती
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।

आज उनसे गुफ़्तगू में बात दिल की बोल दी।
बात दिल की बोल दी।
राज जितने...

रोहित "सादिक़"

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