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Sunday, 24 November 2019

जरुरी तो नहीं...

कह दूं हर बात खुल के, जरूरी तो नहीं।
सह लूं जो गलत हो, जरुरी तो नहीं।।

मै डर डर रहने कि आदत डाल लूंगा, कसम से।
पर इतनी जल्दी बदल जाऊ, जरुरी तो नहीं।।

हां से हां मिला लिया तो क्या, कम था।
तुम ही तुम तो थे हरदम, कहां मै था?

जो गलत है तो रहे कैसे, और सच, ना रहे कैसे।
हम कबूल करें फिर भी... मजबूरी तो नहीं।।

कह दूं हर बात खुल के जरूरी तो नहीं...

रोहित "सादिक"

Saturday, 16 November 2019

न कुछ कहने को..

न कुछ कहने को है।
न सुनने को रहा बाकी।

बिन तुम्हारे कैसे बिताए दिन।
और कैसे रात काटी।

ये इश्क़ का बीमार बच गया फिर भी।
बदन जरजर ...
पर अब तलक है सांस बाकी।

रोहित "सादिक"

Friday, 23 August 2019

मानते हैं कि वो साथ नहीं...

मानते हैं कि वो साथ नहीं।
पर जान लो कि हम अनाथ नहीं।

वो साथ होते तो न जाने क्या बात होती।
पर ये तो पक्का है की खुशियाँ हमारे साथ होती।

अब जो तुम हो तो फिर एक काम कर दो।
हमे रख लो और खुद को हमारे नाम कर दो।

ऐसे मिलो की जिंदगी बहार हो जाये।
जो बीता था कभी वो इतिहास हो जाये।

हम मानते हैं कि अब वो साथ नहीं।
पर जानते हैं कि हम अनाथ नहीं।


रोहित "सादिक़"

Thursday, 25 July 2019

सब बोल दिया और कुछ कहा भी नहीं।
मुँह न खोला और चुप रहा भी नहीं।

ये हुनर है उनमे।

जान लेली और जख्म दिया भी नहीं।

रोहित "सादिक"

Wednesday, 17 July 2019

फ़कत निज़ाम के माफ़िक


फ़क़त निज़ाम के माफ़िक चलूंगा।
मैं अपने ईमान के माफ़िक चलूंगा।

मुझे रास्ता दिखा देगा ख़ुदा खुद ही।
जो मैं इन्सान के माफ़िक चलूंगा।

"रोहित सादिक़"

Tuesday, 9 July 2019

क्या अमीरी, क्या गरीबी

क्या अमीरी, क्या गरीबी।
था कब बादशाह, जो अब बर्बाद हूँ।।

मेरी दौलत का कोई हिसाब नहीं।
मैं "रिस्तो" से बहुत आबाद हूँ।।

रोहित "सादिक़"

Wednesday, 3 July 2019

मुहल्ले में क्या पैगाम..

मोहल्ले में क्या पैगाम जायेगा। 
जब इश्क़ का बीमार सरे आम जायेगा। 

हमे तिजोरियो में रखो अमानत की तरह।
ये तजुर्बा भी जरूरत में बहुत काम आएगा।

रोहित "सादिक़"
-- 
Rohit

Monday, 24 June 2019

संस्कार की बात....

संस्कार अनुवांशिक नहीं होते। और इसके लिए माता, पिता के साथ समाज भी जिम्मेदार होता है।

रोहित "सादिक़"

Friday, 7 June 2019

हम आम गलियों से गुजरते नहीं...

गुमनाम से रहते हैं, कही दिखते नहीं ।
चुप ही रहते हैं कुछ कहते नहीं ।

हमे चुनौती देते हैं, बंजारे गली के।
कह दो, हम...
आम गलियों से गुजरते नहीं ।

रोहित "सादिक़"

Monday, 27 May 2019

राज जितने भी दफ़न थे...

आज उनसे गुफ्तगू में बात बिसरी बोल दी।
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।।

हम जो तब उनसे मिले थे
आधी में दीपक जले थे
बात ही कुछ यूं हुई थी
जो जुबा ने बोल दी

राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।

शाम थी बेबाक अपनी
और सब माधोहोश थी
थी सुबह खुशबू का झोंका
जो सहद सी घोलती
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।

आज उनसे गुफ़्तगू में बात दिल की बोल दी।
बात दिल की बोल दी।
राज जितने...

रोहित "सादिक़"

Sunday, 21 April 2019

पुरुषार्थ

"जब कोई ब्यक्ति अपनी इच्छा से कुछ न कर सके, तो समझ लेना चाहिए कि उसका पुरुषार्थ नष्ट हो गया।।"

रोहित "सादिक़"

Thursday, 28 March 2019

तुम मेरे सुकून का जरिया हो

तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
मेरे ख्वाबो की जागीर।
मेरा पाक नजरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो।

देखु तुम्हें कभी, कभी खुद को
सोचूँ तुम्हें तो कभी खुद को।
मैं सूखे पेड़ का घना जंगल।
तुम प्यार का अपार दरिया हो

तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो

रोहित "सादिक़"

Tuesday, 12 March 2019

मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ...

न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ।
समझ मे कुछ नहीं आता।
मैं हर दिन नये शहर में रहता हूँ।

न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ ।
रोहित "सादिक़"

Wednesday, 20 February 2019

ये तेरी मिजाज गर्जी क्या है

ये तेरी मिजाज गर्जी  क्या है।
आज साफ कर दे तेरी मर्जी क्या है।।
हम गुज़ारिशों में ही काट देंगें क्या सब।
तू देख तेरी अलगर्जी क्या है।।

वक्त बंदिश में कब आता है।
ये कभी भी बदल जाता है।
मैं चाहता हुँ की जान लेले बस प्यार कर मुझसे।
और तू है कि, तेरा क्या जाता है।।

आपको देखा तब मिजाज में नर्मी आई।
जिस्म में हलचल हुई और सांसो में गर्मी आई।
तुम मिली थीं तब के मिली हो अब।
मै समझ न सका कब गई या कब आई।

मुश्किल में हुआ तो फरियाद करता हूँ।
बहुत दुःख हुआ तो तुम्हें याद करता हूँ
तुम हो मेरी बस ये भरम काफी है।
सच तो ये है कि बहुत प्यार करता हूँ।

रोहित "सादिक़"

Saturday, 16 February 2019

एहसास बना रहने दो...

इश्क़ हो न हो पर एहसास बना रहने दो।
कुछ हो न हो पर ख़ास बना रहनें दो।
सूरत ए हाल ही कुछ ऐसा है।
कि मुमताज हो न हो पर ताज बना रहनें दो....
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एहसास बना रहने दो।

रोहित "सादिक़"

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