न जाने किस सफ़र में रहता हूँ। मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ। समझ मे कुछ नहीं आता। मैं हर दिन नये शहर में रहता हूँ।
न जाने किस सफ़र में रहता हूँ। मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ । रोहित "सादिक़"
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