My recommendation

Monday, 30 October 2017

MY WORDS FOREVER

लगा तो लू तेरी तस्वीर आईने में मेरे।
तू बोल की तू मुझमें समा पाएगी क्या।
मैं खुद को देखूँगा तेरी आँखों मे।
तू बोल की मेरी आँखों मे खुद को देख पाएगी क्या।।

ये इश्क़, ये इबादत, ये मिन्नतें।
ये इश्क़, ये  इबादत, ये मिन्नतें।
ये बड़ी मुश्किल सी कबायत है।
मैं तो रोज़ ही करता हूँ।
मुकर जाऊ कभी तो, कर पायेगी क्या।

और
तेरी तकदीर की तू मालकिन नहीं।
लिखी होगी जो मेरी झोली में।
तो बोल फिर बच पाएगी क्या।

रोहित "सादिक़"

Saturday, 28 October 2017

MY WORDS FOREVER

मैं यूँ न करूँगा इज़हार-ए-मुहब्बत।
मसक्कत तुझे भी करनी होगी।।
न मिलेगी उल्फ़त खैरात में तुझे भी।
ये सौदा-ए-बख्त है।
इबादत तुझे भी करनी होगी।।

रोहित "सादिक़"

Thursday, 26 October 2017

MY WORDS FOREVER

ये तो अच्छा है कि मैं ख़ुद को सहेज लेता हूँ।
छोटी हो चादर तो पैरों को समेट लेता हूँ।
मुमकिन है कि उसे हासिल कर लूँ।
गर खट्टे हो अँगूर तो डाली पर ही छोड़ देता हूँ।

रोहित "सादिक़"

Thursday, 12 October 2017

MY WORDS FOREVER

...मुझसे मेरा जिहाद न पूछो...
हुआ है क्या क्या वारदात न पूछो...
साँस लेना भी सहज नही है ग़ैरों में...
जिया हूँ कैसे तिल तिल मरके...
कसम ख़ुदा की बार बार न पूछो...
औऱ
मैं वो नही कि मुकर जाऊँ मुश्किल सफ़र में छोड़ कर...
सफ़र में शूल या मुश्किल सजर को देख कर...
मुकम्मल जंग है जिंदगी से अब तक मेरी...
वो..(ख़ुदा) साथ है मेरे तो फिर क्या चाहिए...
तुम रहने दो मुझसे मेरा हाल न पूछो...
तुम मुझसे मेरा जिहाद न पूछो...
तुम मुझसे मेरा जिहाद न पूछो..._

रोहित "सादिक"

Sunday, 8 October 2017

MY WORDS FOREVER

"जब गुरूर, ब्यक्तित्व से ज्यादा हो जाता है तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों हानि होती है! वैसे ही जैसे पूँछ, कद से ज्यादा लंबी हो तो नुकसान ही करती है!"
रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

अब मैंने इनायत छोड़ दी।
वो फ़िजूल की कबायत छोड़ दी।।
मिटा दी तेरी यादों की बस्ती को।
खुद टूट के तेरी हर शिनाखत तोड़ दी।।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

धुआँ उठा है, कही आग तो लगी होगी।
दिल दुःखा है बहुत, कोई पीड़ तो मिली होगी।
और
कभी फ़ुरसत मिले तो मेरे अश्क की हक़ीकत को सुनना।
इतना तड़पा हूँ, मेरी आह तो निकली होगी।

मुझमें ये कहा कि नर्मी है।
और 
सोच तुझमे कहाँ की गर्मी है।
खुदा ने मोड़ दिया है समन्दर का रूख़ भी साचे में।
तू तो कस्ती है बस फिर किस बात की मर्जी है।

मैं सहज हूँ, या  कि तू सुलझी न अब तक।
कहाँ की तू रानी है तेरी हुक़ूमत है कब तक।
न जाने कब किसका चाँद बुलंद हो जाये।
समझ ले हक़ को ग़र न जाना हो अब तक।

मैं इसारा कर दूँ और तू सब जान जाये।
सिर हिला दूँ जरा और तू मान जाये।
ख़ुदा का करम हो कि मैं संभल जाऊ।
डर है कि तेरी न निकले और मेरी जान जाये।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

आज फिर याद आ गई उसकी।
होठों कोई बात आ गई उसकी।
मैं सपने संजोता रहा रात भर।
बेगाना कोई मांग सजा गया उसकी।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

अब न रास्ते से तालुक है, न मंज़िल को पाने से।
बिरान हुआ हूँ तेरे इश्क में आ जाने से।।
उल्फत भी तेरी क्या रंग लाई।
के लुट गया हूँ मैं दिल के ख़जाने से।।

बस्तियों में अब वो रंगत नहीं रही।
आ गया हूँ शहर के किनारे में।
तफ्तीश मुकम्मल हो तो फिर वापिश जाऊँ।
अकेला हि निकला हूँ, दिल-ए-मयखाने से।।

रोहित गुप्ता "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

न इल्म, न सदाक़त, बस जरा सा चोर हो जाओ।
मुकम्मल है सियासत गर तुम आदमखोर हो जाओ।।
रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

मैं इबादत करता हूँ कि मर जाऊँ।
गुजरा हुआ जमाना हुँ, अब गुजर जाऊँ।।
वो रही न, मैं रहा अब वो।
रेत हूँ मुठ्ठी भर, चाहता हूँ कि बिखर जाऊँ।।

न रहूँ न नजर आऊँ।
टूटे मकानों सा उजड़ जाऊँ।।
परिंदा न रहा, उस घोसले सा।
तिनका हुँ बस, चाहता हूँ कि बिखर जाऊँ।।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

रह रह के तुझे मेरी याद आती रहे।
तेरी हर हिचकी मेरा नाम बुलाती रहे।
तू खुशनसीब हो इतना की जमाना देखे।
हो सब कुछ तेरे पास बस मेरी कमी सताती रहे।

जिसे तू छू ले वो तेरे कदमो में सिमट जाये।
काश तुझे किसी शायर से प्यार हो जाये।
तू इतराये तेरी तारीफ के कसीदों में।
जो टटोले दिल को तो आँखें भर जायेl

तेरी कस्ती समन्दर के पार हो जाये।
तू चमके ऐसे की सूरज की हार हो जाये।
तेरी महफ़िलो को ख़ुदा रोशन रखे हरदम।
बस दुआ कर "सादिक" मर जाये।।
बस दुआ कर की ये "सादिक़" मर जाये।।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

मैं यूँ ही बजा देता हूँ घंटी मंदिर की।
जानता हूँ कि वो गैरो का हो के रह गया।।

रोहित "सादिक़"

Contact Me

Name

Email *

Message *