खुश ही तो हूं।
हसता रहता हूं।
खुश रहो।
कहता रहता हूं।
जन्नत का अरमान काफ़ी है।
खुशी का ये सामान काफ़ी है।
तेरी तलाश जारी है।
अधजली सी लाश काफी है।
ये किरदार इतना ही।
ये पायदान इतना ही।
कफ़न ओढ़े हूं, जला दो।
मैं चला!
मेरा सामान इतना ही।
Rohit Sadik
न आने की दस्तक। न
जाने का पयाम देगी।।
जिंदगी!
अभी और इम्तिहान लेगी।।
अभी भी जान बाकी है।
अभी होना तमाम बाकी है।।
जिद से जिद है इसकी
बस।
नही कुछ और बाकी है
खैर, खुशी, ख्वाहिश मुकम्मल हराम है सादिक!
जिंदगी!
न जाने क्या क्या समान लेगी।
अभी और इम्तिहान लेगी।।
अभी और इम्तिहान लेगी।।
Rohit Sadik
मेरे!
कद से शिकायत मत रख।
ये देख के इरादा क्या है।।
दरिया, समंदर से ही मिलेगा।
ये देख के वादा क्या है।।
खासियत फूलों में है, माना।
बड़ा हुनर है, जाना।।
माली की कदर है फिर भी।
पिरोए तो हार, बिखर जाए तो बेकार।
होने में फरक है फिर भी
फूलों पे असर है फिर भी।
माली की कदर है फिर भी।
Rohit Sadik