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Tuesday, 5 May 2020

कितने अकेले हैं...

कितने अकेले हैं।
जब भी देखते हैं।
पूछते रहते हैं।
खुद से।

बिन बात की बात।
बस बात ही बात।
जब भी करते हैं।
खुद से।

दूर दूर घूमते हैं।
औरो में खुशी ढूड़ते है।

सोचते हैं कि बदल दे।
रस्ता नया चुन ले।
मिले तो कभी।
खुद से।

"रोहित सादिक"

बे-नवा सा बसर मेरा...

बे-नवा सा बसर मेरा। 
कार-ए-सबाब कर दे।।

रोज-ए-हिसाब का इन्तज़ार न कर। 
सर-ए-इताब आ, मुकम्मल बाब कर दे।।

"रोहित सादिक"

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