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Thursday, 28 March 2019

तुम मेरे सुकून का जरिया हो

तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
मेरे ख्वाबो की जागीर।
मेरा पाक नजरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो।

देखु तुम्हें कभी, कभी खुद को
सोचूँ तुम्हें तो कभी खुद को।
मैं सूखे पेड़ का घना जंगल।
तुम प्यार का अपार दरिया हो

तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो

रोहित "सादिक़"

Tuesday, 12 March 2019

मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ...

न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ।
समझ मे कुछ नहीं आता।
मैं हर दिन नये शहर में रहता हूँ।

न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ ।
रोहित "सादिक़"

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