खुशी कभी कभी, गम बहुत भारी है।
मर भी नहीं सकते, जीने की जिम्मेदारी है।।
ये बेगाना शहर, और सख्त बेकारी है।
जहर चढ़ रहा है और सफ़र जारी है!
जरा जरा सा ज़र कर रहा है मुझे।
भीतर तक, तर कर रहा है मुझे।
कतरा कतरा बिका फिर भी,
"सादिक", इश्क में वफादारी है।।
रोहित 🖋️