सब बोल दिया और कुछ कहा भी नहीं।
मुँह न खोला और चुप रहा भी नहीं।
ये हुनर है उनमे।
जान लेली और जख्म दिया भी नहीं।
रोहित "सादिक"
मुँह न खोला और चुप रहा भी नहीं।
ये हुनर है उनमे।
जान लेली और जख्म दिया भी नहीं।
रोहित "सादिक"
फ़क़त निज़ाम के माफ़िक चलूंगा।
मैं अपने ईमान के माफ़िक चलूंगा।
मुझे रास्ता दिखा देगा ख़ुदा खुद ही।
जो मैं इन्सान के माफ़िक चलूंगा।
"रोहित सादिक़"