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Monday, 31 March 2025

जो इतना गुरूर करोगे तो सब बिखर जाएं...

जो इतना गुरूर करोगे तो बिखर जाएंगा।
ग़ुलाम ए उलफ़त और कहां जायेगा।।

अकेला शख्स रात गहरी।
पकड़ लो हाथ नहीं तो डर जायेगा।।

गुजारे के लिए बस धड़कने बाक़ी।
जो मजबूर करोगे तो फिर मर जाएगा।।

रोहित 🖋️

Sunday, 23 March 2025

दो चार मुलाकातों में गज़ब सिलसिले हुए।

दो चार मुलाकातों में गज़ब सिलसिले हुए।
शिकवे कई और कई गिले हुए।।

रोहित 🖋️ 


एक ऐसी मुलाक़ात चाहता हूं।

एक ऐसी मुलाक़ात चाहता हूं।
करनी दो बात चाहता हूं।।

तेरे बगैर ही जी लिया हमने।
तेरे बगैर ही मरना चाहता हूं।।

Rohit 🖋️

Saturday, 22 March 2025

बर्फ़ को पिघलना है आग के पास कर दे जरा।


बर्फ़ को पिघलना है।
आग के पास रख दे जरा।।

धड़कने बाकी हैं अभी जिंदा हूं।
तू दिल पे हाथ रख दे जरा।।

रोहित 🖋️ 

मरीज़ ए इश्क की दवा कौन करेगा

मरीज़ ए इश्क की दवा कौन करेगा।
अब हमसे वफ़ा कौन करेगा।।

ये इश्क सुकून देगा सही।
इस दिल को दूसरी दफ़ा कौन कहेगा।।

रास्तों की शिकायत गवारा है बेशक।
मंज़िल को खफ़ा कौन करेगा।।

रोहित 🖋️

ये सितम हर बार करना चाहता हूं।

ये सितम हर बार करना चाहता हूं।
मैं तेरे रंग में ही रंगना चाहता हूं।

जुलम है जो तक़दीर कर गई मुझपे।
मैं फिर भी जीना साथ मरना चाहता हूं।

रोहित 🖋️

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