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Tuesday, 8 November 2022

ये पायदान इतना ही...

खुश ही तो हूं।
हसता रहता हूं।

खुश रहो।
कहता रहता हूं।

जन्नत का अरमान काफ़ी है।
खुशी का ये सामान काफ़ी है।

तेरी तलाश जारी है।
अधजली सी लाश काफी है।

ये किरदार इतना ही।
ये पायदान इतना ही।

कफ़न ओढ़े हूं, जला दो।
मैं चला!
मेरा सामान इतना ही।

Rohit Sadik 

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