Rohit "Sadik"
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Monday, 22 July 2024
मय(शराब) ने कहा के, अब पियूं मैं भी
मय(शराब) ने कहा के, अब पियूं मैं भी।
बोतलों से निकल, खुल के जियूं मैं भी।
मरहम है कोई, तो अपना काम करे।
क्यूं किसी की चोट सिलूं मैं भी।
रोहित 🖋️
शिखा सिखा के इश्क की बातें मुझे
पहले बहुत कम बोलता था मैं।
बहुत जरूरत हो तभी मुंह खोलता था मैं।
शिखा सिखा के इश्क की बातें मुझे।
बोलती है कि महफिल में बहुत बोलता था मैं।
रोहित 🖋️
वो रूठे तो फिर रूठ गया आइना
वो रूठे तो फिर रूठ गया आइना।
न जाने कब टूट गया आइना।
आंखे बंद की तब वो चेहरा नज़र आया।
जो खुली आंखें तो फिर डूब गया आइना।
रोहित 🖋️
मैं खुद को गुनहगार मानता हूं।
मैं खुद को गुनहगार मानता हूं।
मै उनको अपना यार मानता हूं।
वो जान के दुश्मन हैं मेरे।
मै फिर भी अपनी जान मानता हूं।
रोहित 🖋️
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शिखा सिखा के इश्क की बातें मुझे
वो रूठे तो फिर रूठ गया आइना
मैं खुद को गुनहगार मानता हूं।
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सलीके से क़त्ल करती हैं, बड़ी शातिर हैं।
सलीके से क़त्ल करती हैं, बड़ी शातिर हैं। आँखें कहते हो इन्हें, ये दोनों कि दोनों क़ातिल हैं। Rohit 🖋️
कितना फ़रेब कितना धोखा है।
कितना फ़रेब कितना धोखा है। मैं सच बोलती हूं तुम्हारी कसम, कितनों से उसने यही बोला है।। रोहित 🖋️
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मैं समझ तो गया था उसके दिल की बात। बात बस बात की नहीं उसके इरादे की थी। रोहित 🖋️
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