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Sunday, 31 December 2017

HAPPY NEW YEAR

नव वर्ष, नव सुबह मिली लो, नवल गीत का गान कर लो।
नवल ऊर्जा, नव तरंग है, तुम नया निर्माण कर लो।

प्रीत जीवन मे उतारो, मीत संग रस पान कर लो।
नवल ऊर्जा, नव तरंग है, तुम नया निर्माण कर लो।

तार, हर दिन के बुन लो।
शाम, सुब कि नीति चुन लो।
कर ब्रहत ध्वज, साथ चलना।
रह न जाये कोई तम में।
सब, सभी का हाथ धर लो।

नवल ऊर्जा, नव तरंग है, तुम नया निर्माण कर लो।

नव वर्ष की शुभकामनाएं।
जय हिंद।
रोहित "सादिक़"

Tuesday, 5 December 2017

MY WORDS FOREVER

मैं मुआयने की चीज नहीं।।
फिर नुमाइश में क्यूँ लाये।।
जब होना उसी का है।
तो कोई ख्वाहिश में भी क्यूँ आये।

और
मुझे परख के भी होगा न कुछ हासिल साकी।
मेरी बस्ती लूट चुकी, रहा न कुछ बाकी।
ईमान मेरा और मैं ही हूँ  खजाने में।
"सादिक़" भला क्यूँ साथ माँगे।।

रोहित "सादिक़"

Friday, 1 December 2017

MY WORDS FOREVER

तुम....

कभी फागुन का फाग....

कभी सावन का साज....

कभी भादव का राग....

तुम....

 

तुम....

जैसे झरने का ढंग....

जैसे तितली का रंग....

जैसे सतरंगी दानुष कोई....

जैसे मतवाली लहर  कोई....

तुम....

 

तुम....

सारी में नार लगो....

सरसो का फूल लगो....

मन मोहक रूप लगो....

तुम....

 

तुम....

एक जलती अगन जैसे....

मन की लगन जैसे....

मोहन की बासुरी सी....

तान कोई अनसुनी सी....

तुम....

 

तुम....

एक मुमताज़ नगीना हो....

मेरे मंदिर, मस्जिद, मेरा  मदीना हो....

तुम होली हो, दिवाली हो, तुम ही रमजान हो....

गीता, रामायन तुम ही कुरान हो....

तुम....

 

तुम....

एक मीठी सी चाह मेरी....

झिलमिल सी राह मेरी....

सपनो के ताज़ जैसी....

किसलय की कली कोई....

तुम....

 

तुम रखो कदम जहाँ....

वो घर आबाद हो जाये....

रहे क़ायम क़यामत तलक बादशाहत तेरी....

फेर दे जो एक नज़र "सादिक़" ग़ुलाम  जाये।

रोहित "सादिक़ "

Friday, 17 November 2017

MY WORDS FOREVER

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

मेरी साँसों के राग ...

धडकन के गीत ...

आत्मा के  मीत ...

आप ही मेरे सिरमौर हैं ...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

कटी पतंग सी थी जिंदगी...

आपने मुझे सम्भाला ...

डोर थामी मेरे जीवन की ...

बाँहों का दिया सिरान्हा...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

मैं कैसे भूलूँ वो बेवजह बरस जाना...

वो रेत सा बिखरना कभी ...

कभी फिर बाँहों में सिमट जाना...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

आप हो तो मुझमें जान है...

आप से ही तो मुस्कान है...

मैं बेसुध, बेजान हूँ बिन आपके...

आपके साथ ही मेरी उड़ान है...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

मै सिर्फ परछाई हूँ आपकी...

और आप सारा जहांन हैं...

आपकी जिंदगी में ये दिन बार बार आये...

मैं यादों में ही रहूँ चाहे...

मेरी भी उमर आपको लग जाये...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

रोहित "सादिक"

MY WORDS FOREVER

दरकार दोनो की है याद रखना ।
साथ मांगा है सबका याद रखना।।
तुम हुए न मेरे, हो कर भी मेरे।
रहेंगे न खुश याद रखना।।

दोस्ती दिल से हो तभी बेहतर।
न हो यार सच्चा सिर्फ कहकर।।
ये दिखावे का धंधा नही है फ़क़त।
चोट सबको लगती है याद रखना।।

रोहित "सादिक़"

Sunday, 12 November 2017

MY WORDS FOREVER

मुझे यूँ  तो न करें मशहूर कि अख़बार हो जाऊं।
तुम मेरे ख़ातिर ख़ुदा हो जाओ।
मैं तुम्हारी ख़ातिर ख़लीफ़ा हो जाऊं।

दरकार दोनो की है, याद रखना ।
साथ मांगा हूँ  मैं, याद रखना।।
मेरे न हुए, हो कर भी मेरे।
कहीं का न रहूँगा, याद रखना।।

ये तुम्हारी ही तिजारत है।
जिंदगी भी मेरी।।
हो जाये न ख़यानत।।
याद रखना।।

रोहित "सादिक़"

Monday, 30 October 2017

MY WORDS FOREVER

लगा तो लू तेरी तस्वीर आईने में मेरे।
तू बोल की तू मुझमें समा पाएगी क्या।
मैं खुद को देखूँगा तेरी आँखों मे।
तू बोल की मेरी आँखों मे खुद को देख पाएगी क्या।।

ये इश्क़, ये इबादत, ये मिन्नतें।
ये इश्क़, ये  इबादत, ये मिन्नतें।
ये बड़ी मुश्किल सी कबायत है।
मैं तो रोज़ ही करता हूँ।
मुकर जाऊ कभी तो, कर पायेगी क्या।

और
तेरी तकदीर की तू मालकिन नहीं।
लिखी होगी जो मेरी झोली में।
तो बोल फिर बच पाएगी क्या।

रोहित "सादिक़"

Saturday, 28 October 2017

MY WORDS FOREVER

मैं यूँ न करूँगा इज़हार-ए-मुहब्बत।
मसक्कत तुझे भी करनी होगी।।
न मिलेगी उल्फ़त खैरात में तुझे भी।
ये सौदा-ए-बख्त है।
इबादत तुझे भी करनी होगी।।

रोहित "सादिक़"

Thursday, 26 October 2017

MY WORDS FOREVER

ये तो अच्छा है कि मैं ख़ुद को सहेज लेता हूँ।
छोटी हो चादर तो पैरों को समेट लेता हूँ।
मुमकिन है कि उसे हासिल कर लूँ।
गर खट्टे हो अँगूर तो डाली पर ही छोड़ देता हूँ।

रोहित "सादिक़"

Thursday, 12 October 2017

MY WORDS FOREVER

...मुझसे मेरा जिहाद न पूछो...
हुआ है क्या क्या वारदात न पूछो...
साँस लेना भी सहज नही है ग़ैरों में...
जिया हूँ कैसे तिल तिल मरके...
कसम ख़ुदा की बार बार न पूछो...
औऱ
मैं वो नही कि मुकर जाऊँ मुश्किल सफ़र में छोड़ कर...
सफ़र में शूल या मुश्किल सजर को देख कर...
मुकम्मल जंग है जिंदगी से अब तक मेरी...
वो..(ख़ुदा) साथ है मेरे तो फिर क्या चाहिए...
तुम रहने दो मुझसे मेरा हाल न पूछो...
तुम मुझसे मेरा जिहाद न पूछो...
तुम मुझसे मेरा जिहाद न पूछो..._

रोहित "सादिक"

Sunday, 8 October 2017

MY WORDS FOREVER

"जब गुरूर, ब्यक्तित्व से ज्यादा हो जाता है तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों हानि होती है! वैसे ही जैसे पूँछ, कद से ज्यादा लंबी हो तो नुकसान ही करती है!"
रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

अब मैंने इनायत छोड़ दी।
वो फ़िजूल की कबायत छोड़ दी।।
मिटा दी तेरी यादों की बस्ती को।
खुद टूट के तेरी हर शिनाखत तोड़ दी।।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

धुआँ उठा है, कही आग तो लगी होगी।
दिल दुःखा है बहुत, कोई पीड़ तो मिली होगी।
और
कभी फ़ुरसत मिले तो मेरे अश्क की हक़ीकत को सुनना।
इतना तड़पा हूँ, मेरी आह तो निकली होगी।

मुझमें ये कहा कि नर्मी है।
और 
सोच तुझमे कहाँ की गर्मी है।
खुदा ने मोड़ दिया है समन्दर का रूख़ भी साचे में।
तू तो कस्ती है बस फिर किस बात की मर्जी है।

मैं सहज हूँ, या  कि तू सुलझी न अब तक।
कहाँ की तू रानी है तेरी हुक़ूमत है कब तक।
न जाने कब किसका चाँद बुलंद हो जाये।
समझ ले हक़ को ग़र न जाना हो अब तक।

मैं इसारा कर दूँ और तू सब जान जाये।
सिर हिला दूँ जरा और तू मान जाये।
ख़ुदा का करम हो कि मैं संभल जाऊ।
डर है कि तेरी न निकले और मेरी जान जाये।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

आज फिर याद आ गई उसकी।
होठों कोई बात आ गई उसकी।
मैं सपने संजोता रहा रात भर।
बेगाना कोई मांग सजा गया उसकी।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

अब न रास्ते से तालुक है, न मंज़िल को पाने से।
बिरान हुआ हूँ तेरे इश्क में आ जाने से।।
उल्फत भी तेरी क्या रंग लाई।
के लुट गया हूँ मैं दिल के ख़जाने से।।

बस्तियों में अब वो रंगत नहीं रही।
आ गया हूँ शहर के किनारे में।
तफ्तीश मुकम्मल हो तो फिर वापिश जाऊँ।
अकेला हि निकला हूँ, दिल-ए-मयखाने से।।

रोहित गुप्ता "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

न इल्म, न सदाक़त, बस जरा सा चोर हो जाओ।
मुकम्मल है सियासत गर तुम आदमखोर हो जाओ।।
रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

मैं इबादत करता हूँ कि मर जाऊँ।
गुजरा हुआ जमाना हुँ, अब गुजर जाऊँ।।
वो रही न, मैं रहा अब वो।
रेत हूँ मुठ्ठी भर, चाहता हूँ कि बिखर जाऊँ।।

न रहूँ न नजर आऊँ।
टूटे मकानों सा उजड़ जाऊँ।।
परिंदा न रहा, उस घोसले सा।
तिनका हुँ बस, चाहता हूँ कि बिखर जाऊँ।।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

रह रह के तुझे मेरी याद आती रहे।
तेरी हर हिचकी मेरा नाम बुलाती रहे।
तू खुशनसीब हो इतना की जमाना देखे।
हो सब कुछ तेरे पास बस मेरी कमी सताती रहे।

जिसे तू छू ले वो तेरे कदमो में सिमट जाये।
काश तुझे किसी शायर से प्यार हो जाये।
तू इतराये तेरी तारीफ के कसीदों में।
जो टटोले दिल को तो आँखें भर जायेl

तेरी कस्ती समन्दर के पार हो जाये।
तू चमके ऐसे की सूरज की हार हो जाये।
तेरी महफ़िलो को ख़ुदा रोशन रखे हरदम।
बस दुआ कर "सादिक" मर जाये।।
बस दुआ कर की ये "सादिक़" मर जाये।।

रोहित "सादिक़"

MY WORDS FOREVER

मैं यूँ ही बजा देता हूँ घंटी मंदिर की।
जानता हूँ कि वो गैरो का हो के रह गया।।

रोहित "सादिक़"

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