मुझे यूँ तो न करें मशहूर कि अख़बार हो जाऊं।
तुम मेरे ख़ातिर ख़ुदा हो जाओ।
मैं तुम्हारी ख़ातिर ख़लीफ़ा हो जाऊं।
दरकार दोनो की है, याद रखना ।
साथ मांगा हूँ मैं, याद रखना।।
मेरे न हुए, हो कर भी मेरे।
कहीं का न रहूँगा, याद रखना।।
ये तुम्हारी ही तिजारत है।
जिंदगी भी मेरी।।
हो जाये न ख़यानत।।
याद रखना।।
रोहित "सादिक़"
No comments:
Post a Comment