...मुझसे मेरा जिहाद न पूछो...
हुआ है क्या क्या वारदात न पूछो...
साँस लेना भी सहज नही है ग़ैरों में...
जिया हूँ कैसे तिल तिल मरके...
कसम ख़ुदा की बार बार न पूछो...
औऱ
मैं वो नही कि मुकर जाऊँ मुश्किल सफ़र में छोड़ कर...
सफ़र में शूल या मुश्किल सजर को देख कर...
मुकम्मल जंग है जिंदगी से अब तक मेरी...
वो..(ख़ुदा) साथ है मेरे तो फिर क्या चाहिए...
तुम रहने दो मुझसे मेरा हाल न पूछो...
तुम मुझसे मेरा जिहाद न पूछो...
तुम मुझसे मेरा जिहाद न पूछो..._
रोहित "सादिक"
Nice
ReplyDeleteThanks
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