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Saturday, 9 December 2023

खुश ही तो हूं

खुश ही तो हूं।
हसता रहता हूं।

खुश रहो।
कहता रहता हूं।

जन्नत का अरमान ही काफ़ी है।
खुशी का ये सामान ही काफ़ी है।

तेरी तलाश जारी है फिर भी।
अधजली सी लाश काफी है फिर भी।

ये किरदार इतना ही।
ये पायदान इतना ही।

कफ़न ओढ़े हूं, जला दो।
मैं चला, मेरा सामान इतना ही।

रोहित 🖋️

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