ये तेरी मिजाज गर्जी क्या है।
आज साफ कर दे तेरी मर्जी क्या है।।
हम गुज़ारिशों में ही काट देंगें क्या सब।
तू देख तेरी अलगर्जी क्या है।।
वक्त बंदिश में कब आता है।
ये कभी भी बदल जाता है।
मैं चाहता हुँ की जान लेले बस प्यार कर मुझसे।
और तू है कि, तेरा क्या जाता है।।
आपको देखा तब मिजाज में नर्मी आई।
जिस्म में हलचल हुई और सांसो में गर्मी आई।
तुम मिली थीं तब के मिली हो अब।
मै समझ न सका कब गई या कब आई।
मुश्किल में हुआ तो फरियाद करता हूँ।
बहुत दुःख हुआ तो तुम्हें याद करता हूँ
तुम हो मेरी बस ये भरम काफी है।
सच तो ये है कि बहुत प्यार करता हूँ।
रोहित "सादिक़"
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