इश्क़ हो न हो पर एहसास बना रहने दो। कुछ हो न हो पर ख़ास बना रहनें दो। सूरत ए हाल ही कुछ ऐसा है। कि मुमताज हो न हो पर ताज बना रहनें दो.... . . . एहसास बना रहने दो।
रोहित "सादिक़"
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