न कुछ कहने को है। न सुनने को रहा बाकी।
बिन तुम्हारे कैसे बिताए दिन। और कैसे रात काटी।
ये इश्क़ का बीमार बच गया फिर भी। बदन जरजर ... पर अब तलक है सांस बाकी।
रोहित "सादिक"
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