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Thursday, 5 April 2018

तेरी आदत सुधर जाये तो ग़नीमत है...

तेरी आदत सुधर जाये तो ग़नीमत है।
मेरी बात समझ आये तो ग़नीमत है।
जो रंग चढ़ा है तुझपे, वो सजा, न किसी पे।
तेरा भी जल्द उतर जाये तो ग़नीमत है।

रोहित सादिक़

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