न जाने कब मेरा जोर आजमाया जायेगा।
उस कयामत से कब पर्दा उठाया जायेगा।।
जले तो रोज दिये उनकी यादों के।
न जाने कब इनको बुझाया जायेगा।।
ये सोच के ही बसर है अपना।
मौसम का भी असर है अपना।।
मदहोश होने तक, कब हमको पिलाया जायेगा।
फिर आखिर कब हमको संभाला जायेगा।।
तारों के साथ गुजरेगी हमारी कब तक।
कब चाँद मेरे घर उतरा जायेगा।।
न जाने कब मेरा जोर आजमाया जायेगा।
उस कयामत से कब पर्दा उठाया जायेगा ...
रोहित सादिक
उस कयामत से कब पर्दा उठाया जायेगा।।
जले तो रोज दिये उनकी यादों के।
न जाने कब इनको बुझाया जायेगा।।
ये सोच के ही बसर है अपना।
मौसम का भी असर है अपना।।
मदहोश होने तक, कब हमको पिलाया जायेगा।
फिर आखिर कब हमको संभाला जायेगा।।
तारों के साथ गुजरेगी हमारी कब तक।
कब चाँद मेरे घर उतरा जायेगा।।
न जाने कब मेरा जोर आजमाया जायेगा।
उस कयामत से कब पर्दा उठाया जायेगा ...
रोहित सादिक
No comments:
Post a Comment