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Tuesday, 14 April 2020

जिंदगी...

क्या करें यहां झमेले बहुत हैं।
डरते हैं क्यूकी अकेले बहुत हैं।।

मेरे हमसफ़र! हमदम! मेरे हमराह!
मुझे सहारा दिए रहना।।

ये जिदंगी का दरिया है।
यहां थपेड़े बहुत हैं।।

क्या करें यहां झमेल बहुत हैं।

रोहित "सादिक"

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