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Saturday, 20 June 2020

आखरी सितम

मुझे छोटे में नहीं कुछ बड़े में रहना है।
मार देना अगर तो एक एहसान भी कर देना।।
कहीं यमुना में नहीं मुझे समन्दर में बहना है।

सायद ये आखिरी हो गुनाह मेरा।
मै बेगुनाह हूं बस यही गुनाह मेरा।।

मै साबित ना कर पाऊंगा, मासूम होके भी बच ना पाऊंगा।
मेरे गुनाहों के नाम न गिना पाएंगे गिनाने वाले।
फिर भी बचा न पाएंगे मुझे बचाने वाले।।

तुम्हे अफसोस तो होगा पर कह न पाओगे किसी से।
मेरी बात करने का मन तो होगा पर कर न पाओगे किसी।

तुम्हारे हाथ खाली होंगे मुझे लूट लेने के बाद।
रो रो के रहोगी मेरे जाने के बाद।

रोहित सादिक

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