My recommendation

Wednesday, 17 March 2021

जिंदगी ! ये क्या कंजूसी


जिंदगी ! ये क्या कंजूसी ...


यू ही जिए जा रहे हैं। 

जो पाया, सो खाया, 

नहीं तो पिए जा हैं। 


जिंदगी ! ये क्या मजाक है ...  


खुशियाँ बे मोल हैं। 

न जाने क्या कमाने की होड़ है। 


क्यू सोचू, के क्या जोडू, क्या छोड़ू। 

क्या बेजा और क्या बेजोड़ है।


जिंदगी ! ये क्या गज़ब है ... 

समझा, न कुछ

सब कुछ अजब है।  


वही लोग, वही कल, वही आज है। 

कुछ भी तो नहीं बदला मुझमे। 

वही मै, और वही काम-काज है।


जिंदगी... 


रोहित 

No comments:

Post a Comment

Contact Me

Name

Email *

Message *