ये तजुर्बा भी जरूरत में बहुत काम आएगा।
My recommendation
Wednesday, 3 July 2019
मुहल्ले में क्या पैगाम..
ये तजुर्बा भी जरूरत में बहुत काम आएगा।
Monday, 24 June 2019
संस्कार की बात....
संस्कार अनुवांशिक नहीं होते। और इसके लिए माता, पिता के साथ समाज भी जिम्मेदार होता है।
रोहित "सादिक़"
Friday, 7 June 2019
हम आम गलियों से गुजरते नहीं...
गुमनाम से रहते हैं, कही दिखते नहीं ।
चुप ही रहते हैं कुछ कहते नहीं ।
हमे चुनौती देते हैं, बंजारे गली के।
कह दो, हम...
आम गलियों से गुजरते नहीं ।
रोहित "सादिक़"
Monday, 27 May 2019
राज जितने भी दफ़न थे...
आज उनसे गुफ्तगू में बात बिसरी बोल दी।
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।।
हम जो तब उनसे मिले थे
आधी में दीपक जले थे
बात ही कुछ यूं हुई थी
जो जुबा ने बोल दी
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।
शाम थी बेबाक अपनी
और सब माधोहोश थी
थी सुबह खुशबू का झोंका
जो सहद सी घोलती
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।
आज उनसे गुफ़्तगू में बात दिल की बोल दी।
बात दिल की बोल दी।
राज जितने...
रोहित "सादिक़"
Sunday, 21 April 2019
पुरुषार्थ
"जब कोई ब्यक्ति अपनी इच्छा से कुछ न कर सके, तो समझ लेना चाहिए कि उसका पुरुषार्थ नष्ट हो गया।।"
रोहित "सादिक़"
Thursday, 28 March 2019
तुम मेरे सुकून का जरिया हो
तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
मेरे ख्वाबो की जागीर।
मेरा पाक नजरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
देखु तुम्हें कभी, कभी खुद को
सोचूँ तुम्हें तो कभी खुद को।
मैं सूखे पेड़ का घना जंगल।
तुम प्यार का अपार दरिया हो
तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो
रोहित "सादिक़"
Tuesday, 12 March 2019
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ...
न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ।
समझ मे कुछ नहीं आता।
मैं हर दिन नये शहर में रहता हूँ।
न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ ।
रोहित "सादिक़"
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सलीके से क़त्ल करती हैं, बड़ी शातिर हैं। आँखें कहते हो इन्हें, ये दोनों कि दोनों क़ातिल हैं। Rohit 🖋️
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कितना फ़रेब कितना धोखा है। मैं सच बोलती हूं तुम्हारी कसम, कितनों से उसने यही बोला है।। रोहित 🖋️
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मैं समझ तो गया था उसके दिल की बात। बात बस बात की नहीं उसके इरादे की थी। रोहित 🖋️