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Saturday, 16 November 2019

न कुछ कहने को..

न कुछ कहने को है।
न सुनने को रहा बाकी।

बिन तुम्हारे कैसे बिताए दिन।
और कैसे रात काटी।

ये इश्क़ का बीमार बच गया फिर भी।
बदन जरजर ...
पर अब तलक है सांस बाकी।

रोहित "सादिक"

Friday, 23 August 2019

मानते हैं कि वो साथ नहीं...

मानते हैं कि वो साथ नहीं।
पर जान लो कि हम अनाथ नहीं।

वो साथ होते तो न जाने क्या बात होती।
पर ये तो पक्का है की खुशियाँ हमारे साथ होती।

अब जो तुम हो तो फिर एक काम कर दो।
हमे रख लो और खुद को हमारे नाम कर दो।

ऐसे मिलो की जिंदगी बहार हो जाये।
जो बीता था कभी वो इतिहास हो जाये।

हम मानते हैं कि अब वो साथ नहीं।
पर जानते हैं कि हम अनाथ नहीं।


रोहित "सादिक़"

Thursday, 25 July 2019

सब बोल दिया और कुछ कहा भी नहीं।
मुँह न खोला और चुप रहा भी नहीं।

ये हुनर है उनमे।

जान लेली और जख्म दिया भी नहीं।

रोहित "सादिक"

Wednesday, 17 July 2019

फ़कत निज़ाम के माफ़िक


फ़क़त निज़ाम के माफ़िक चलूंगा।
मैं अपने ईमान के माफ़िक चलूंगा।

मुझे रास्ता दिखा देगा ख़ुदा खुद ही।
जो मैं इन्सान के माफ़िक चलूंगा।

"रोहित सादिक़"

Tuesday, 9 July 2019

क्या अमीरी, क्या गरीबी

क्या अमीरी, क्या गरीबी।
था कब बादशाह, जो अब बर्बाद हूँ।।

मेरी दौलत का कोई हिसाब नहीं।
मैं "रिस्तो" से बहुत आबाद हूँ।।

रोहित "सादिक़"

Wednesday, 3 July 2019

मुहल्ले में क्या पैगाम..

मोहल्ले में क्या पैगाम जायेगा। 
जब इश्क़ का बीमार सरे आम जायेगा। 

हमे तिजोरियो में रखो अमानत की तरह।
ये तजुर्बा भी जरूरत में बहुत काम आएगा।

रोहित "सादिक़"
-- 
Rohit

Monday, 24 June 2019

संस्कार की बात....

संस्कार अनुवांशिक नहीं होते। और इसके लिए माता, पिता के साथ समाज भी जिम्मेदार होता है।

रोहित "सादिक़"

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