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Friday, 20 November 2020

अबकी सर्दी

अबकी सर्दी अच्छी है। 
पर जगना पड़ता है।।

मन ना भी हो।
पर लगना पड़ता है।।

साँस रुकने को कहती है। 
पर जीने के लिए कुछ करना पड़ता है।।

अच्छा !

अबकी सर्दी में कुछ खास होगा।
अकेले कब से थे, पर अब एहसास होगा।।

ये बदनसीबी का सिलसिला अच्छा।
लगी आग तो घर जला अच्छा।।

अबकी सर्दी, गद्दा कहीं, और रजाई कहीं और।
दिया कहीं, और दिया सलाई कहीं और।।

जब जीना दुसवार! तो क्या मंदिर क्या मदीना अच्छा। 
ऐसी हो सर्दी तो। 
फिर चिल-चिलाता पसीना अच्छा है।

रोहित "सादिक"

Thursday, 15 October 2020

मेरी ख़ुशी के मायने अलग हैं...

 मेरी ख़ुशी के मायने अलग हैं। 

तेरी ख़ुशी के मायने अलग हैं।। 


ज़िंदगी कैसे दिखे एक सी हमको। 

हमारे आईने अलग अलग  हैं।। 


Rohit Sadik

Friday, 7 August 2020

जब तक तुझे होश रहेगा...

जब तक तुझे होश रहेगा।
ये तो तय है, अफ़सोस रहेगा।।

तूझे जिद है तो है ऊंचा उड़ने की।
आशिया - ए - शुकूं ज़मीदोज़ रहेगा।।

Rohit Sadik


Thursday, 23 July 2020

जवाबदारी किसकी है?

जवाबदारी  किसकी है?
जवाबदारी  किसकी है?

गर हम ऐसे हैं तो।
ये जिम्मेदारी किसकी है?

जवाबदारी  किसकी है?

कौन आये, उठाये, बोझ जिंदगी का?
समझ नहीं आता के अबकी बारी किसकी है?

ये जिम्मेदारी किसकी है?
जवाबदारी  किसकी है?


रोहित सादिक

Saturday, 20 June 2020

आखरी सितम

मुझे छोटे में नहीं कुछ बड़े में रहना है।
मार देना अगर तो एक एहसान भी कर देना।।
कहीं यमुना में नहीं मुझे समन्दर में बहना है।

सायद ये आखिरी हो गुनाह मेरा।
मै बेगुनाह हूं बस यही गुनाह मेरा।।

मै साबित ना कर पाऊंगा, मासूम होके भी बच ना पाऊंगा।
मेरे गुनाहों के नाम न गिना पाएंगे गिनाने वाले।
फिर भी बचा न पाएंगे मुझे बचाने वाले।।

तुम्हे अफसोस तो होगा पर कह न पाओगे किसी से।
मेरी बात करने का मन तो होगा पर कर न पाओगे किसी।

तुम्हारे हाथ खाली होंगे मुझे लूट लेने के बाद।
रो रो के रहोगी मेरे जाने के बाद।

रोहित सादिक

Tuesday, 5 May 2020

कितने अकेले हैं...

कितने अकेले हैं।
जब भी देखते हैं।
पूछते रहते हैं।
खुद से।

बिन बात की बात।
बस बात ही बात।
जब भी करते हैं।
खुद से।

दूर दूर घूमते हैं।
औरो में खुशी ढूड़ते है।

सोचते हैं कि बदल दे।
रस्ता नया चुन ले।
मिले तो कभी।
खुद से।

"रोहित सादिक"

बे-नवा सा बसर मेरा...

बे-नवा सा बसर मेरा। 
कार-ए-सबाब कर दे।।

रोज-ए-हिसाब का इन्तज़ार न कर। 
सर-ए-इताब आ, मुकम्मल बाब कर दे।।

"रोहित सादिक"

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