जिंदगी ! ये क्या कंजूसी ...
यू ही जिए जा रहे हैं।
जो पाया, सो खाया,
नहीं तो पिए जा हैं।
जिंदगी ! ये क्या मजाक है ...
खुशियाँ बे मोल हैं।
न जाने क्या कमाने की होड़ है।
क्यू सोचू, के क्या जोडू, क्या छोड़ू।
क्या बेजा और क्या बेजोड़ है।
जिंदगी ! ये क्या गज़ब है ...
समझा, न कुछ
सब कुछ अजब है।
वही लोग, वही कल, वही आज है।
कुछ भी तो नहीं बदला मुझमे।
वही मै, और वही काम-काज है।
जिंदगी...
रोहित