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Wednesday, 17 March 2021

जिंदगी ! ये क्या कंजूसी


जिंदगी ! ये क्या कंजूसी ...


यू ही जिए जा रहे हैं। 

जो पाया, सो खाया, 

नहीं तो पिए जा हैं। 


जिंदगी ! ये क्या मजाक है ...  


खुशियाँ बे मोल हैं। 

न जाने क्या कमाने की होड़ है। 


क्यू सोचू, के क्या जोडू, क्या छोड़ू। 

क्या बेजा और क्या बेजोड़ है।


जिंदगी ! ये क्या गज़ब है ... 

समझा, न कुछ

सब कुछ अजब है।  


वही लोग, वही कल, वही आज है। 

कुछ भी तो नहीं बदला मुझमे। 

वही मै, और वही काम-काज है।


जिंदगी... 


रोहित 

Friday, 5 March 2021

जो मेरी भूल, मुझे भुगतने दो

जो मेऽरी भूल, मुझे भुगतने दो।
जाओ, तुम स‌ऽऽब दूर जाओ।।

ये मेरी लाश, और आऽऽग मेरी।
तुम घी डालो, और मुझे जलने दो।।

रोहित सादिक

Tuesday, 12 January 2021

हमे ख़ाश-ओ-आम न समझा जाये।

 हमे ख़ाश-ओ-आम न समझा जाये। 

किसी का मान या अरमान न समझा जाये। 

हमे भी जिंदगी जीने दो खुलकर। 

मेरे करीबियों !

हमे बस मतलब का सामान न समझा जाये। 


तुम हमदर्द, हमराह हो तो फिर साथ आओ। 

सफर का दर्द और कुछ चोट खाओ। 

हमने सींचा पसीने से जिस बाग़ को। 

उसके फूलों को गजरे का सामान न समझा जाये। 


तुम्हारे लिए कुछ कर दे तो अहसान न समझा जाये। 

जो कुछ कह दे तो अपमान न समझा जाये। 

हम सीढ़ी बने की तुम छू लो ऊचाइयों को। 

हमे ही अर्थी का सामान न समझा जाये। 


हमें न ख़ास ! न आम ! न जरूरी सामान ! समझा जाये। .. 



रोहित

Saturday, 26 December 2020

मै दूर जाउंगा जरूर

मै दूर जाऊंगा जरूर।
एक बार बुलाऊंगा जरुर।।
हाल ऐसा है मेरे बसर का।
जल्द गुजर जाऊंगा जरूर।।

ज़िन्दगी रही न अब चाह बाकी।
एक जिद के सिवा न राह बाकी।।
वो देखेंगे, मै दिखाउंगा जरूर।
मैं दूर जाउंगा जरूर।।

जी में जो आये करते जाओ।
मार दो या फिर मरते जाओ।।
ये कशमकश साथ है मेरे अभी भी।
अभी और रुलाऊगा जरुर।
मैं दूर जाउंगा जरूर।

Friday, 20 November 2020

अबकी सर्दी

अबकी सर्दी अच्छी है। 
पर जगना पड़ता है।।

मन ना भी हो।
पर लगना पड़ता है।।

साँस रुकने को कहती है। 
पर जीने के लिए कुछ करना पड़ता है।।

अच्छा !

अबकी सर्दी में कुछ खास होगा।
अकेले कब से थे, पर अब एहसास होगा।।

ये बदनसीबी का सिलसिला अच्छा।
लगी आग तो घर जला अच्छा।।

अबकी सर्दी, गद्दा कहीं, और रजाई कहीं और।
दिया कहीं, और दिया सलाई कहीं और।।

जब जीना दुसवार! तो क्या मंदिर क्या मदीना अच्छा। 
ऐसी हो सर्दी तो। 
फिर चिल-चिलाता पसीना अच्छा है।

रोहित "सादिक"

Thursday, 15 October 2020

मेरी ख़ुशी के मायने अलग हैं...

 मेरी ख़ुशी के मायने अलग हैं। 

तेरी ख़ुशी के मायने अलग हैं।। 


ज़िंदगी कैसे दिखे एक सी हमको। 

हमारे आईने अलग अलग  हैं।। 


Rohit Sadik

Friday, 7 August 2020

जब तक तुझे होश रहेगा...

जब तक तुझे होश रहेगा।
ये तो तय है, अफ़सोस रहेगा।।

तूझे जिद है तो है ऊंचा उड़ने की।
आशिया - ए - शुकूं ज़मीदोज़ रहेगा।।

Rohit Sadik


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