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Monday, 30 January 2023

तेरे खयाल का खयाल आया...

तेरे खयाल का खयाल आया।
मेरे सामने ये सवाल आया।।

फरिस्ते लगे हैं सोहबत में।
खुदा का ये जवाब आया।।

Rohit 🖋️

आंगन में फूल खिले हो और पास में हरियाली हो...

क्या बात हो अगर शर्द शाम और गर्म चाय की प्याली हो।
आंगन में फूल खिले हो और पास में हरियाली हो।

Rohit 🖋️

खुदा ख़ुद भी घायल है...

अब तो खुदाई की भी ख़ैर नहीं।
हुजूर ए आला भी कायल है।।

इन मासूम निगाहों का कहर ऐसा।।
खुदा ख़ुद भी घायल है।।

Rohit Gupta 🖋️🙏

Sunday, 29 January 2023

आंगन में फूल खिले हो और पास में हरियाली हो...

क्या बात हो अगर शर्द शाम और गर्म चाय की प्याली हो।
आंगन में फूल खिले हो और पास में हरियाली हो।

Rohit 🖋️

Friday, 27 January 2023

इन मासूम निगाहों का कहर ऐसा...

अब तो खुदाई की भी ख़ैर नहीं।
हुजूर ए आला भी कायल है।।

इन मासूम निगाहों का कहर ऐसा।
खुदा ख़ुद भी घायल है।।

Rohit Sadik 🖋️🙏

Tuesday, 8 November 2022

ये पायदान इतना ही...

खुश ही तो हूं।
हसता रहता हूं।

खुश रहो।
कहता रहता हूं।

जन्नत का अरमान काफ़ी है।
खुशी का ये सामान काफ़ी है।

तेरी तलाश जारी है।
अधजली सी लाश काफी है।

ये किरदार इतना ही।
ये पायदान इतना ही।

कफ़न ओढ़े हूं, जला दो।
मैं चला!
मेरा सामान इतना ही।

Rohit Sadik 

Tuesday, 13 September 2022

जिंदगी! अभी और इम्तिहान लेगी।।

न आने की दस्तक। न

 जाने का पयाम देगी।।


जिंदगी!

अभी और इम्तिहान लेगी।।


अभी भी जान बाकी है।

अभी होना तमाम बाकी है।।


जिद से जिद है इसकी

बस।

नही कुछ और बाकी है

 

खैर, खुशी, ख्वाहिश मुकम्मल हराम है सादिक!


जिंदगी!

न जाने क्या क्या समान लेगी।

अभी और इम्तिहान लेगी।।

अभी और इम्तिहान लेगी।।


Rohit Sadik

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