तुझे अपनी गलती का एहसास होगा।
भरोसा है तुझे भी प्यार होगा।
एड़िया रगड़ रहा हूँ जो तेरे दरो-दीवार के।
यकीं है तुझे भी इंतजार होगा।
ये गुलिस्ताँ-ए-हुस्न कब मुकम्मल साथ देता है।
ख़बर रख, काटों से काम होगा।
तुझे अपनी गलती का एहसास होगा।
रोहित "सादिक़ "
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