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Friday, 27 April 2018

अब प्यार करने को मैं न रह पाउँगा...

अब प्यार करने को मैं न रह पाउँगा...
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मेरे जाने का गम, न आने की ख़ुशी होगी।
मेरे बाद, न जिंदगी होगी।
तू आस्तीन में रखती है, न जाने क्या क्या।
मैं यूं मुकर जाऊंगा, सोचती होगी।

मैं कुछ कहूँ भी न, चुप रहूँ भी न।
पास पास मगर साथ रहूँ भी न।
तू खुद से पूछ के तेरी आँखों में अब भी पानी है?
मैं कैसे कहूँ के सांस लूँ मगर जी पाऊँ भी न।

मेरे मजबूर क़दम अब ठहर से गए।
तुझे देख यूँ, ये सहम से गए।
मैं देखूँ कभी उसे, कभी तुझे।
चोट लगी और हम दहल गए।

तेरा मिजाज तुझे मुबारक हो।
ये साज बाज तुझे मुबारक हो।
मैं ख़ुश हूँ की, तू खुश हो।
और गम है, की खुश क्यूँ हो।

तेरी चाल मैं न चल पाउँगा।
मामला दिल का है खुल के न कह पाउँगा।
तुझे अब जरुरत है, की संभल जाये।
माफ़ करने को हर बार मैं न रह पाउँगा।
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अब प्यार करने को मैं न रह पाउँगा।।

रोहित "सादिक़"

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