मैं साँवन भादौं सा बरस जाऊँगा। दो बूँद ही छलका जो तर भीतर तक कर जाऊँगा।
ये जो तपिश तेरे खयालो में है मेरी ख़ातिर। मैं बादल हु बस मोती सा बिखर जाऊँगा।
कब ओश की बूंदें प्यास मिटाती हैं। बस प्यास और ज्यादा बढ़ाती है।
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