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Saturday, 20 June 2020

आखरी सितम

मुझे छोटे में नहीं कुछ बड़े में रहना है।
मार देना अगर तो एक एहसान भी कर देना।।
कहीं यमुना में नहीं मुझे समन्दर में बहना है।

सायद ये आखिरी हो गुनाह मेरा।
मै बेगुनाह हूं बस यही गुनाह मेरा।।

मै साबित ना कर पाऊंगा, मासूम होके भी बच ना पाऊंगा।
मेरे गुनाहों के नाम न गिना पाएंगे गिनाने वाले।
फिर भी बचा न पाएंगे मुझे बचाने वाले।।

तुम्हे अफसोस तो होगा पर कह न पाओगे किसी से।
मेरी बात करने का मन तो होगा पर कर न पाओगे किसी।

तुम्हारे हाथ खाली होंगे मुझे लूट लेने के बाद।
रो रो के रहोगी मेरे जाने के बाद।

रोहित सादिक

Tuesday, 5 May 2020

कितने अकेले हैं...

कितने अकेले हैं।
जब भी देखते हैं।
पूछते रहते हैं।
खुद से।

बिन बात की बात।
बस बात ही बात।
जब भी करते हैं।
खुद से।

दूर दूर घूमते हैं।
औरो में खुशी ढूड़ते है।

सोचते हैं कि बदल दे।
रस्ता नया चुन ले।
मिले तो कभी।
खुद से।

"रोहित सादिक"

बे-नवा सा बसर मेरा...

बे-नवा सा बसर मेरा। 
कार-ए-सबाब कर दे।।

रोज-ए-हिसाब का इन्तज़ार न कर। 
सर-ए-इताब आ, मुकम्मल बाब कर दे।।

"रोहित सादिक"

Thursday, 30 April 2020

थोड़ा बदचलन होना चाहिए !

जिंदगी गुजारने के लिये चाल चलन होना जरुरी है !
लज्जत बनी रहे।
इसलिए थोड़ा बदचलन होना जरुरी है।।

रोहित सादिक

Thursday, 23 April 2020

तेरी खुली जुल्फों को सवारू

तेरी खुली जुल्फों को सवारू।
तू कह के तो देख।
फूल क़दमों में बिछा दू।
तू कह के तो देख।
 मै ख़ुद तेरा साथ चाहता हूं, कसम से।
फना तुझपे हो जाऊ।
तू कह के तो देख।

रोहित सादिक

Tuesday, 14 April 2020

जिंदगी...

क्या करें यहां झमेले बहुत हैं।
डरते हैं क्यूकी अकेले बहुत हैं।।

मेरे हमसफ़र! हमदम! मेरे हमराह!
मुझे सहारा दिए रहना।।

ये जिदंगी का दरिया है।
यहां थपेड़े बहुत हैं।।

क्या करें यहां झमेल बहुत हैं।

रोहित "सादिक"

Tuesday, 7 April 2020

Lockdown

समझ में कुछ क्यूं नही आता।
मैं मजबूर हूं तो तू ही क्यूं नही आता।।

मेरे रब, मेरे मौला, मेरे परवरदिगार।
हम तेरे ही तो बंदे हैं।।

जानें दे पास मुझे, मेरे चहीतो के।
नहीं तो देर क्यूं, क्यूं अपने ही पास नहीं बुलाता।।

समझ में कुछ क्यूं नही आता...

रोहित सादिक

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