My recommendation

Saturday, 29 February 2020

मैं इसका उसका सबका होने में रह गया...

मैं इसका उसका सबका होने में रह गया।
ऐ जिंदगी तुझे समझने में रह गया।

अब तो सबो-रोज कट रहे इसी कशमकश में।
के क्या रहा बाकी मुझमें और क्या गुज़र गया।।

ऐ जिंदगी तुझे समझने में रह गया...

मेरी हस्ती जो कुछ थी भी क्या?
मैं कुछ हूं अभी भी क्या?

न जाने ये चाव कब हुआ।
मैं कौड़ियों के भाव कब हुआ।

अंधेरों की आदत नहीं थी मुझको।
मैं दिये जलाने में रह गया।।

मैं सबका होने में रह गया
मैं सबका होने में रह गया....

रोहित सादिक




No comments:

Post a Comment

Contact Me

Name

Email *

Message *