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Wednesday, 21 May 2025

हम फिर भी जन्नती हैं साकी।

हम फिर भी जन्नती हैं साकी।
फरेब कहा किया है हमने।

हममें बुराई हैं तो हैं।
परहेज़ कहा किया है हमने।

तुम कहो झुक जाए क्या सच में।
गुरेज कहा किया है हमने।

तुम्हें क़ुबूल हो तो कह दो।
बंधेज कहा किया है हमने।

रोहित 🖋️

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