गुमनाम से रहते हैं, कही दिखते नहीं ।
चुप ही रहते हैं कुछ कहते नहीं ।
हमे चुनौती देते हैं, बंजारे गली के।
कह दो, हम...
आम गलियों से गुजरते नहीं ।
रोहित "सादिक़"
गुमनाम से रहते हैं, कही दिखते नहीं ।
चुप ही रहते हैं कुछ कहते नहीं ।
हमे चुनौती देते हैं, बंजारे गली के।
कह दो, हम...
आम गलियों से गुजरते नहीं ।
रोहित "सादिक़"
आज उनसे गुफ्तगू में बात बिसरी बोल दी।
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।।
हम जो तब उनसे मिले थे
आधी में दीपक जले थे
बात ही कुछ यूं हुई थी
जो जुबा ने बोल दी
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।
शाम थी बेबाक अपनी
और सब माधोहोश थी
थी सुबह खुशबू का झोंका
जो सहद सी घोलती
राज जितने भी दफ़न थे आँसुओ ने खोल दी।
आज उनसे गुफ़्तगू में बात दिल की बोल दी।
बात दिल की बोल दी।
राज जितने...
रोहित "सादिक़"
"जब कोई ब्यक्ति अपनी इच्छा से कुछ न कर सके, तो समझ लेना चाहिए कि उसका पुरुषार्थ नष्ट हो गया।।"
रोहित "सादिक़"
तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
मेरे ख्वाबो की जागीर।
मेरा पाक नजरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
देखु तुम्हें कभी, कभी खुद को
सोचूँ तुम्हें तो कभी खुद को।
मैं सूखे पेड़ का घना जंगल।
तुम प्यार का अपार दरिया हो
तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो
रोहित "सादिक़"
न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ।
समझ मे कुछ नहीं आता।
मैं हर दिन नये शहर में रहता हूँ।
न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ ।
रोहित "सादिक़"
ये तेरी मिजाज गर्जी क्या है।
आज साफ कर दे तेरी मर्जी क्या है।।
हम गुज़ारिशों में ही काट देंगें क्या सब।
तू देख तेरी अलगर्जी क्या है।।
वक्त बंदिश में कब आता है।
ये कभी भी बदल जाता है।
मैं चाहता हुँ की जान लेले बस प्यार कर मुझसे।
और तू है कि, तेरा क्या जाता है।।
आपको देखा तब मिजाज में नर्मी आई।
जिस्म में हलचल हुई और सांसो में गर्मी आई।
तुम मिली थीं तब के मिली हो अब।
मै समझ न सका कब गई या कब आई।
मुश्किल में हुआ तो फरियाद करता हूँ।
बहुत दुःख हुआ तो तुम्हें याद करता हूँ
तुम हो मेरी बस ये भरम काफी है।
सच तो ये है कि बहुत प्यार करता हूँ।
रोहित "सादिक़"
इश्क़ हो न हो पर एहसास बना रहने दो।
कुछ हो न हो पर ख़ास बना रहनें दो।
सूरत ए हाल ही कुछ ऐसा है।
कि मुमताज हो न हो पर ताज बना रहनें दो....
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एहसास बना रहने दो।
रोहित "सादिक़"