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Tuesday, 8 November 2022
ये पायदान इतना ही...
Tuesday, 13 September 2022
जिंदगी! अभी और इम्तिहान लेगी।।
न आने की दस्तक। न
जाने का पयाम देगी।।
जिंदगी!
अभी और इम्तिहान लेगी।।
अभी भी जान बाकी है।
अभी होना तमाम बाकी है।।
जिद से जिद है इसकी
बस।
नही कुछ और बाकी है
खैर, खुशी, ख्वाहिश मुकम्मल हराम है सादिक!
जिंदगी!
न जाने क्या क्या समान लेगी।
अभी और इम्तिहान लेगी।।
अभी और इम्तिहान लेगी।।
Rohit Sadik
Tuesday, 6 September 2022
माली की कदर है फिर भी।
मेरे!
कद से शिकायत मत रख।
ये देख के इरादा क्या है।।
दरिया, समंदर से ही मिलेगा।
ये देख के वादा क्या है।।
खासियत फूलों में है, माना।
बड़ा हुनर है, जाना।।
माली की कदर है फिर भी।
पिरोए तो हार, बिखर जाए तो बेकार।
होने में फरक है फिर भी
फूलों पे असर है फिर भी।
माली की कदर है फिर भी।
Rohit Sadik
Thursday, 17 June 2021
सात खून माफ़ी है।
तू लड़की है, तेरा यही हुनर काफी है।
मेरी एक गलती में फांसी, तेरा सात खून माफ़ी है।
रोहित
Wednesday, 17 March 2021
जिंदगी ! ये क्या कंजूसी
जिंदगी ! ये क्या कंजूसी ...
यू ही जिए जा रहे हैं।
जो पाया, सो खाया,
नहीं तो पिए जा हैं।
जिंदगी ! ये क्या मजाक है ...
खुशियाँ बे मोल हैं।
न जाने क्या कमाने की होड़ है।
क्यू सोचू, के क्या जोडू, क्या छोड़ू।
क्या बेजा और क्या बेजोड़ है।
जिंदगी ! ये क्या गज़ब है ...
समझा, न कुछ
सब कुछ अजब है।
वही लोग, वही कल, वही आज है।
कुछ भी तो नहीं बदला मुझमे।
वही मै, और वही काम-काज है।
जिंदगी...
रोहित
Friday, 5 March 2021
जो मेरी भूल, मुझे भुगतने दो
Tuesday, 12 January 2021
हमे ख़ाश-ओ-आम न समझा जाये।
हमे ख़ाश-ओ-आम न समझा जाये।
किसी का मान या अरमान न समझा जाये।
हमे भी जिंदगी जीने दो खुलकर।
मेरे करीबियों !
हमे बस मतलब का सामान न समझा जाये।
तुम हमदर्द, हमराह हो तो फिर साथ आओ।
सफर का दर्द और कुछ चोट खाओ।
हमने सींचा पसीने से जिस बाग़ को।
उसके फूलों को गजरे का सामान न समझा जाये।
तुम्हारे लिए कुछ कर दे तो अहसान न समझा जाये।
जो कुछ कह दे तो अपमान न समझा जाये।
हम सीढ़ी बने की तुम छू लो ऊचाइयों को।
हमे ही अर्थी का सामान न समझा जाये।
हमें न ख़ास ! न आम ! न जरूरी सामान ! समझा जाये। ..
रोहित
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सलीके से क़त्ल करती हैं, बड़ी शातिर हैं। आँखें कहते हो इन्हें, ये दोनों कि दोनों क़ातिल हैं। Rohit 🖋️
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कितना फ़रेब कितना धोखा है। मैं सच बोलती हूं तुम्हारी कसम, कितनों से उसने यही बोला है।। रोहित 🖋️
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मैं समझ तो गया था उसके दिल की बात। बात बस बात की नहीं उसके इरादे की थी। रोहित 🖋️