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Wednesday, 3 January 2018

बाल कविता

चित्र विचित्र बना घनघोर।
चले है बढ़ते तम की ओर।
कलयुग की चाभी है पकड़ी।
खुले काल मुख चारो ओर।

बादल बदले।
नदियाँ बदली।
थल-नभ बदले चारो ओर।
कलयुग की चाभी है पकड़ी।
खुले काल मुख चारो ओर।

उजड़े वन, उपवन सब उजड़े।
कूप तड़ाग सरोवर छिछले।

कमतर पगडण्डी सब उजड़ी।
और गाँव की गालियाँ उजड़ीं।
खपरैले की चौपालें भी।
घासों की झोपड़ियाँ उजड़ीं।

तिनके बिखरे चारो ओर।
कलयुग की चाभी है पकड़ी।
खुले काल मुख चारो ओर।

चमकीली तितली की लड़ियाँ।
मोर चकोर सुहावन चिड़ियाँ।
अब न रहीं बौरें रसबोर।
कलयुग की चाभी है पकड़ी।
खुले काल मुख चारो ओर।

कौतूहल हो रहा प्रकृति में।
असमंजस में दुनियाँ सारी।
कर दोहन धरनी का निसदिन।
सींच रहे अपनी फुलवारी।


कर विकाश, विनाश का प्रतिदिन।
हो प्रसन्न गुणगान कर रहे।
कोप प्रकृति बरसाये जिसदिन।
मिलकर सब क्यूँ विलाप कर रहे।

आओ हम सब फूल खिलाये।
धरनी का श्रृंगार सजायें।
वापस लें आये नदियों को।
जहाँ विहग सब सोर मचाये।

स्वस्थ धरा हो वायु सुगन्धित।
स्वस्थ समाज रहे हरओर।

कलयुग की चाभी जो पकड़ी।
खुलेंगे कालमुख चारोओर।

रोहित "सादिक़ "

Sunday, 31 December 2017

HAPPY NEW YEAR

नव वर्ष, नव सुबह मिली लो, नवल गीत का गान कर लो।
नवल ऊर्जा, नव तरंग है, तुम नया निर्माण कर लो।

प्रीत जीवन मे उतारो, मीत संग रस पान कर लो।
नवल ऊर्जा, नव तरंग है, तुम नया निर्माण कर लो।

तार, हर दिन के बुन लो।
शाम, सुब कि नीति चुन लो।
कर ब्रहत ध्वज, साथ चलना।
रह न जाये कोई तम में।
सब, सभी का हाथ धर लो।

नवल ऊर्जा, नव तरंग है, तुम नया निर्माण कर लो।

नव वर्ष की शुभकामनाएं।
जय हिंद।
रोहित "सादिक़"

Tuesday, 5 December 2017

MY WORDS FOREVER

मैं मुआयने की चीज नहीं।।
फिर नुमाइश में क्यूँ लाये।।
जब होना उसी का है।
तो कोई ख्वाहिश में भी क्यूँ आये।

और
मुझे परख के भी होगा न कुछ हासिल साकी।
मेरी बस्ती लूट चुकी, रहा न कुछ बाकी।
ईमान मेरा और मैं ही हूँ  खजाने में।
"सादिक़" भला क्यूँ साथ माँगे।।

रोहित "सादिक़"

Friday, 1 December 2017

MY WORDS FOREVER

तुम....

कभी फागुन का फाग....

कभी सावन का साज....

कभी भादव का राग....

तुम....

 

तुम....

जैसे झरने का ढंग....

जैसे तितली का रंग....

जैसे सतरंगी दानुष कोई....

जैसे मतवाली लहर  कोई....

तुम....

 

तुम....

सारी में नार लगो....

सरसो का फूल लगो....

मन मोहक रूप लगो....

तुम....

 

तुम....

एक जलती अगन जैसे....

मन की लगन जैसे....

मोहन की बासुरी सी....

तान कोई अनसुनी सी....

तुम....

 

तुम....

एक मुमताज़ नगीना हो....

मेरे मंदिर, मस्जिद, मेरा  मदीना हो....

तुम होली हो, दिवाली हो, तुम ही रमजान हो....

गीता, रामायन तुम ही कुरान हो....

तुम....

 

तुम....

एक मीठी सी चाह मेरी....

झिलमिल सी राह मेरी....

सपनो के ताज़ जैसी....

किसलय की कली कोई....

तुम....

 

तुम रखो कदम जहाँ....

वो घर आबाद हो जाये....

रहे क़ायम क़यामत तलक बादशाहत तेरी....

फेर दे जो एक नज़र "सादिक़" ग़ुलाम  जाये।

रोहित "सादिक़ "

Friday, 17 November 2017

MY WORDS FOREVER

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

मेरी साँसों के राग ...

धडकन के गीत ...

आत्मा के  मीत ...

आप ही मेरे सिरमौर हैं ...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

कटी पतंग सी थी जिंदगी...

आपने मुझे सम्भाला ...

डोर थामी मेरे जीवन की ...

बाँहों का दिया सिरान्हा...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

मैं कैसे भूलूँ वो बेवजह बरस जाना...

वो रेत सा बिखरना कभी ...

कभी फिर बाँहों में सिमट जाना...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

आप हो तो मुझमें जान है...

आप से ही तो मुस्कान है...

मैं बेसुध, बेजान हूँ बिन आपके...

आपके साथ ही मेरी उड़ान है...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

मै सिर्फ परछाई हूँ आपकी...

और आप सारा जहांन हैं...

आपकी जिंदगी में ये दिन बार बार आये...

मैं यादों में ही रहूँ चाहे...

मेरी भी उमर आपको लग जाये...

आप जानते नहीं, कि आप मेरे कौन हैं...

रोहित "सादिक"

MY WORDS FOREVER

दरकार दोनो की है याद रखना ।
साथ मांगा है सबका याद रखना।।
तुम हुए न मेरे, हो कर भी मेरे।
रहेंगे न खुश याद रखना।।

दोस्ती दिल से हो तभी बेहतर।
न हो यार सच्चा सिर्फ कहकर।।
ये दिखावे का धंधा नही है फ़क़त।
चोट सबको लगती है याद रखना।।

रोहित "सादिक़"

Sunday, 12 November 2017

MY WORDS FOREVER

मुझे यूँ  तो न करें मशहूर कि अख़बार हो जाऊं।
तुम मेरे ख़ातिर ख़ुदा हो जाओ।
मैं तुम्हारी ख़ातिर ख़लीफ़ा हो जाऊं।

दरकार दोनो की है, याद रखना ।
साथ मांगा हूँ  मैं, याद रखना।।
मेरे न हुए, हो कर भी मेरे।
कहीं का न रहूँगा, याद रखना।।

ये तुम्हारी ही तिजारत है।
जिंदगी भी मेरी।।
हो जाये न ख़यानत।।
याद रखना।।

रोहित "सादिक़"

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