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Wednesday, 20 February 2019

ये तेरी मिजाज गर्जी क्या है

ये तेरी मिजाज गर्जी  क्या है।
आज साफ कर दे तेरी मर्जी क्या है।।
हम गुज़ारिशों में ही काट देंगें क्या सब।
तू देख तेरी अलगर्जी क्या है।।

वक्त बंदिश में कब आता है।
ये कभी भी बदल जाता है।
मैं चाहता हुँ की जान लेले बस प्यार कर मुझसे।
और तू है कि, तेरा क्या जाता है।।

आपको देखा तब मिजाज में नर्मी आई।
जिस्म में हलचल हुई और सांसो में गर्मी आई।
तुम मिली थीं तब के मिली हो अब।
मै समझ न सका कब गई या कब आई।

मुश्किल में हुआ तो फरियाद करता हूँ।
बहुत दुःख हुआ तो तुम्हें याद करता हूँ
तुम हो मेरी बस ये भरम काफी है।
सच तो ये है कि बहुत प्यार करता हूँ।

रोहित "सादिक़"

Saturday, 16 February 2019

एहसास बना रहने दो...

इश्क़ हो न हो पर एहसास बना रहने दो।
कुछ हो न हो पर ख़ास बना रहनें दो।
सूरत ए हाल ही कुछ ऐसा है।
कि मुमताज हो न हो पर ताज बना रहनें दो....
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एहसास बना रहने दो।

रोहित "सादिक़"

Sunday, 25 November 2018

मुझे दासता सुनाने दो...

मुझे दासता सुनाने दो।
कुछ नए रास्ते बनाने दो।
मेरी फ़ितरतो को मत देखो।
नए आसमां बनाने दो।

मैं अब वो नही हूँ, जो था कभी।
मैं हुआ हूँ ऐसा, अब, अभी अभी।
मेरी ज़िंदगी में आओ, फिर देखो।
साथ चलो, बस कारवाँ बनाने दो।।

रोहित "सादिक़"

Monday, 23 July 2018

न कुछ कहा न सुना उसने...

न कुछ कहा न सुना उसने।
लाखो में एक मुझे चुना जिसने।
ये किसकी नजर लगी रब जाने।
बीच रास्ते मे छोड़ा मुझे।
कसमे खाई थी सात जन्मों कि जिसने।

किसपे ऐतबार करू, इतराऊ किसपे।
एक जान वो भी छोटी सी।
किसे किसे चाहूँ, लूट जाऊं किस पे।

उस सितमगर की भेंट चड़ के भी तो सुकूँ नही आया।
मारा छुरी भी उसी ने।
जान कहके कभी बुलाया था जिसने।

न कुछ कहा न सुना उसने।

रोहित "सादिक़"

Wednesday, 27 June 2018

मैं साँवन भादौ सा बरस जाऊँगा

मैं साँवन भादौं सा बरस जाऊँगा।
दो बूँद ही छलका जो तर भीतर तक कर जाऊँगा।

ये जो तपिश तेरे खयालो में है मेरी ख़ातिर।
मैं बादल हु बस मोती सा बिखर जाऊँगा।

कब ओश की बूंदें प्यास मिटाती हैं।
बस प्यास और ज्यादा बढ़ाती है।

Saturday, 16 June 2018

इश्क़ में बेवफ़ा से हमदर्दी जरूरी है।

अब तो बेवफ़ा होना भी आम है।
ये कौन सा कोई मुश्किल काम है।

इश्क़ में बेवफ़ा से हमदर्दी जरूरी है।
वफ़ा की क़दर के लिए।
बेकदरी जरूरी है।

रोहित सादिक़

Tuesday, 12 June 2018

उनके हुजरे में गये की रूसवाई मिटा लें।

उनके हुजरे में गये कि रुसवाई मिटा लें।
दो घूट लें और सारी तनहाई मिटा लें।
वो एड़ियां रगड़ रहीं हैं कि बस, कोई हीरा उन्हें मिल जाये।
ये नहीं कि, ये, कोहिनूर गले लगा लें।

रोहित "सादिक़"

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