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Thursday, 28 March 2019

तुम मेरे सुकून का जरिया हो

तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
मेरे ख्वाबो की जागीर।
मेरा पाक नजरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो।

देखु तुम्हें कभी, कभी खुद को
सोचूँ तुम्हें तो कभी खुद को।
मैं सूखे पेड़ का घना जंगल।
तुम प्यार का अपार दरिया हो

तुम मेरे सुकून का जरिया हो।
तुम मेरे सुकून का जरिया हो

रोहित "सादिक़"

Tuesday, 12 March 2019

मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ...

न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ।
समझ मे कुछ नहीं आता।
मैं हर दिन नये शहर में रहता हूँ।

न जाने किस सफ़र में रहता हूँ।
मैं ख्वाबों के शजर में रहता हूँ ।
रोहित "सादिक़"

Wednesday, 20 February 2019

ये तेरी मिजाज गर्जी क्या है

ये तेरी मिजाज गर्जी  क्या है।
आज साफ कर दे तेरी मर्जी क्या है।।
हम गुज़ारिशों में ही काट देंगें क्या सब।
तू देख तेरी अलगर्जी क्या है।।

वक्त बंदिश में कब आता है।
ये कभी भी बदल जाता है।
मैं चाहता हुँ की जान लेले बस प्यार कर मुझसे।
और तू है कि, तेरा क्या जाता है।।

आपको देखा तब मिजाज में नर्मी आई।
जिस्म में हलचल हुई और सांसो में गर्मी आई।
तुम मिली थीं तब के मिली हो अब।
मै समझ न सका कब गई या कब आई।

मुश्किल में हुआ तो फरियाद करता हूँ।
बहुत दुःख हुआ तो तुम्हें याद करता हूँ
तुम हो मेरी बस ये भरम काफी है।
सच तो ये है कि बहुत प्यार करता हूँ।

रोहित "सादिक़"

Saturday, 16 February 2019

एहसास बना रहने दो...

इश्क़ हो न हो पर एहसास बना रहने दो।
कुछ हो न हो पर ख़ास बना रहनें दो।
सूरत ए हाल ही कुछ ऐसा है।
कि मुमताज हो न हो पर ताज बना रहनें दो....
.
.
.
एहसास बना रहने दो।

रोहित "सादिक़"

Sunday, 25 November 2018

मुझे दासता सुनाने दो...

मुझे दासता सुनाने दो।
कुछ नए रास्ते बनाने दो।
मेरी फ़ितरतो को मत देखो।
नए आसमां बनाने दो।

मैं अब वो नही हूँ, जो था कभी।
मैं हुआ हूँ ऐसा, अब, अभी अभी।
मेरी ज़िंदगी में आओ, फिर देखो।
साथ चलो, बस कारवाँ बनाने दो।।

रोहित "सादिक़"

Monday, 23 July 2018

न कुछ कहा न सुना उसने...

न कुछ कहा न सुना उसने।
लाखो में एक मुझे चुना जिसने।
ये किसकी नजर लगी रब जाने।
बीच रास्ते मे छोड़ा मुझे।
कसमे खाई थी सात जन्मों कि जिसने।

किसपे ऐतबार करू, इतराऊ किसपे।
एक जान वो भी छोटी सी।
किसे किसे चाहूँ, लूट जाऊं किस पे।

उस सितमगर की भेंट चड़ के भी तो सुकूँ नही आया।
मारा छुरी भी उसी ने।
जान कहके कभी बुलाया था जिसने।

न कुछ कहा न सुना उसने।

रोहित "सादिक़"

Wednesday, 27 June 2018

मैं साँवन भादौ सा बरस जाऊँगा

मैं साँवन भादौं सा बरस जाऊँगा।
दो बूँद ही छलका जो तर भीतर तक कर जाऊँगा।

ये जो तपिश तेरे खयालो में है मेरी ख़ातिर।
मैं बादल हु बस मोती सा बिखर जाऊँगा।

कब ओश की बूंदें प्यास मिटाती हैं।
बस प्यास और ज्यादा बढ़ाती है।

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